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कोरोना को मात दे गया पापी पेट का सवाल.????

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कोरोना को मात दे गया पापी पेट का सवाल.

– आवश्यक सामग्री पर 15 % से अधिक महगाई.

रोज कुंआ खोदना और रोज पानी पीना ‘ वाले मजदूरों के हो रहें हैं लाले.

मुख्तार सागर ,

आसेगांव 27 मार्च.
प्रधानमंत्री आदेश के अनुसार पहले धारा 144 के तहत एक दिन का जनता कर्फ्यू फिर दूसरे आदेश के तहत धारा 188 समेत लॉकडाउन की घोषणा से देश भर की जनता, कोरोना वायरस के खात्मे के लिए घरों में अपने परिवार संग रहकर जंग लड़ रहें हैं. लगभग 5 दिन से अधिक लॉकडाउन के कारण जहां गरीब तबका घरों में अपने काम धंदा छोड कर बैठे हैं वहीं रोज मजदूर और खेत मजदूरों को भी अब अपने परिवार के जीवनयापन की चिंता सता रही है. कभी एक माह का तो कभी तीन माह का राशन सब को मिलने वाला है इस प्रकार की सरकार की ओर से घोषणा पर घोषणा हो रही है लेकिन पापी पेट का सवाल उन्हें घर में बैठने नही दे रहा है. कुछ मजदूर तबका तो पैसे की कमी और बढ़ती महंगाई के डर से खेती की तरफ काम के लिए निकल पडा है. ऐसी ही कुछ आज खेतों में काम करते मजदूर और खेत में गरीब मजदूर द्वारा गेहूं का सर्वा ( कटाई के बाद जमीन पर गिरी हुई गेहूं की बालियां [उंबी] ) कड़ी धूप में बीनने (चुनने) की नौबत आगई है.

आदेश का उलंघन जीवनावश्यक सामग्री की अधिक कीमत पर बिक्री::
कोरोना वायरस के प्रकोप के दौरान घोषित किए गए लॉकडाउन के दौरान भी जीवनावश्यक वस्तुओ की बिक्री सीमित समय के लिए अनुमति दी गई है जबकि इन वस्तुओ का संग्रहण नही करते हुए अधिक दाम पर नही बेचने पर जिलाधिकारी ऋषिकेश मोडक द्वारा सभी विक्रेताओं को आदेश दिए गए. ग्रामीण भाग में अनेक विक्रेता जिन में सब्जीफरोश और किराना विक्रेता का समावेश है. इस तरह 15 प्रतिशत से अधिक अपनी सामग्री की खपत करना जिलाधिकारी के आदेश का उलंघन करने जैसा है. संबंधित विभाग से इस तरफ ध्यान देकर अधिक दाम की खपत पर लगाम लगाने की गुहार ग्रामीण परिसर के नागरिकों द्वारा लगाई जा रही है.

पापी पेट का सवाल बड़ा निकला कोरोना वायरस से ::
प्रतिक्रिया :
“” मैं एक गरीब विधवा लगभग तीन वर्ष से पूर्व खंडवा से आकर ग्राम दसतापूर में एक झोपड़ी में बिना बिजली व बिना राशनकार्ड के अपनी तीन नातिन (नवासियों) के साथ निवास कर रही हूं अब जब लॉकडाउन पर सब बंद होने पर सब के लिए राशन आएगा तो राशनकार्ड नही होने पर मुझे नही मिलेगा. इस लिए पेट की आग बुझाने खेतो से अपनी नवासी (पूनम संतोष शिंदे) के साथ गेहूं का सर्वा चुन कर रोटीरोजी का प्रबंध कर रही हूं.””
— कोंडाबाई तुलसीराम शिंदे दसतापूर.जि: वाशिम
-फोटो में : 1) विधवा महिला अपनी नातिन के साथ सरवा चुनते हुए.
2) आसेगांव परिसर में खेत की सफाई में जुटे मजदूर.