Home विदर्भ और उनके चेहेरे पर मुस्कान खिल गई????

और उनके चेहेरे पर मुस्कान खिल गई????

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सोशल मीडिया के सदुपयोग से उत्तरभारतीयों को मिली राहत.
– तहसीलदार ने पहुंचाया जीवन आवश्यक सामग्री.

मुख्तार सागर ,

आसेगांव 5 अप्रैल.
प्रतिवर्ष उत्तरप्रदेश के व्यवसाई राज्य में विभिन्न स्थान पर तथा समीपस्थ ग्राम धानोरा में ठंडपिये की परदेसी कोल्ड्रिंक्स और अल्पोहार की भेल भंडार का आयोजन ग्रीष्मकाल से पूर्व करते हैं. लेकिन विदेश से आए कोरोना वाइरस के खतरे से बचने के लिए भारत सरकार के आदेश के अनुसार 22 मार्च से देश भर में लॉकडाउन होने से किराना दुकान, दवाखाना, मेडिकल, दूध डेअरी और सब्जीपाले की बिक्री के अलावा सभी कारोबार पर संचारबंदी के चलते ठप पडे हैं. भदंवि की धारा 144 और 188 कलम के लागू होने पर देश की जनता अपना कीमती समय घरों में बीताना उचित समझ रही हैं. लेकिन बाहर राज्य से अपने व्यवसाय व शिक्षण प्राप्त करने के मामले में अटके लोग कुछ नही कर पा रहे है. जबकि घरों में रहकर लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक लोगों के उपयोग से सोशल मीडिया को दुगना प्रतिसाद मिल रहा है. कोई इसके दुरुपयोग में फंसा हुआ है तो कोई इसके सदुपयोग से लाभ उठा रहा है. ऐसा ही राज्य उत्तरप्रदेश के जिला कन्नौज की तहसिल तरवा के ग्राम सतसार से महाराष्ट्र राज्य के जिला वाशिम की तहसिल के ग्राम धानोरा खुर्द में अरुण ठाकुर परदेसी, प्रमोद ठाकुर परदेसी एवं कनैया ठाकुर परदेसी नामक युवक, चार वर्ष से परदेसी कोल्ड्रिंक्स व अल्पोहार की भेल भंडार की सेवा को अंजाम दे रहे है. लेकिन 22 मार्च से लॉकडाउन के बाद राज्य व जिला की हद बंदी से जनजीवन लड़खड़ा गया है. लेकिन उक्त व्यवसाई ने सोशल मीडिया पर फेसबुक के सदुपयोग से फायदा उठाते हुए उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ कंट्रोल रूम से संपर्क साधकर लॉकडाउन के दौरान पेश आनेवाली दिक्कतों को उजागर कर मदद की गुहार लगाई तो वहां से वाशिम हेडऑफिस को काल आया और यहां से उक्त व्यवसाई को सहायता पहुंचाने के लिए मंगरूलपीर तहसीलदार को फोन काल द्वारा आदेश के मिलते ही धानोरा खुर्द स्थित उत्तरभारती व्यवसाई की तलाश कर उन्हें 15 दिन की जीवन आवश्यक सामग्री व भाजीसब्जी दी गई तथा जरूरत पडने पर संपर्क साधने को कहा गया है.
– तीनों व्यवसाई को मिली जीवनयापन सामग्री
-छाया : मुख्तार सागर.

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