
जलगांव :
अल्पसंख्यक दिवस की पूर्व संध्या पर आज जलगांव जिल्हा अधिकारी कार्यालय के सामने एकता संगठन की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला का हिजाब हटाकर किए गए घिनौने, असभ्य और सत्ता के अहंकार से भरे कृत्य के खिलाफ तीखा, आक्रामक और चेतावनीपूर्ण निषेध प्रदर्शन किया गया।
एकता संगठन की महिला समिति की आलिमा नाजिया ने साफ शब्दों में कहा कि यह घटना महज असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि महिला की गरिमा पर सीधा हमला और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का खुला उल्लंघन है।
जो व्यक्ति मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठा हो, वही यदि महिला की देह और आस्था पर हाथ डाले, तो यह लोकतंत्र के पतन की सबसे खतरनाक तस्वीर है।
एकता संगठन ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार सत्ता के नशे में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें न महिला सम्मान की मर्यादा याद रही, न संविधान की कसम।
यह कृत्य दर्शाता है कि आज देश में महिलाओं के शरीर, कपड़े और आस्था को राजनीतिक प्रदर्शन की वस्तु बनाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेताया कि
आज हिजाब हटाया गया है, कल किसी और महिला की आस्था और अस्मिता रौंदी जाएगी — अगर आज आवाज़ नहीं उठी तो कल इतिहास माफ़ नहीं करेगा।
एकता संगठन ने दो टूक कहा कि यह कृत्य मानवाधिकारों का अपराध है।
यह महिला विरोधी मानसिकता का खुला प्रदर्शन है।
यह अल्पसंख्यकों को डराने और अपमानित करने की साजिश का हिस्सा है।
एकता संगठन की कड़ी मांगें :
नीतीश कुमार इस शर्मनाक कृत्य पर तत्काल, बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगें।
. महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर जांच की जाए।
भविष्य में किसी भी महिला के धार्मिक, व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एकता संगठन के समन्वयक फारूक शेख ने चेतावनी भरे लहजे में कहा—
“अगर सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग ही महिलाओं का अपमान करेंगे,
तो सड़क से संसद तक जवाब मिलेगा।
हिजाब हमारी पहचान है,
और पहचान पर हमला हुआ — तो संघर्ष तय है











































