Home विदर्भ प्रशासन द्वारा लगाए गए लौकडाउन के खिलाफ व्यापारियों में नाराजगी का माहौल

प्रशासन द्वारा लगाए गए लौकडाउन के खिलाफ व्यापारियों में नाराजगी का माहौल

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रविंद्र साखरे – तालेगांव शमजीपंत

वर्धा – प्रशासन ने जिस प्रकार लौकडाउन लगाकर उसमें कीराना , रेस्टोरेंट , नाश्ता और मीठाई की दुकानों को छुट दी है अब भला कोई हर रोज कीराना लेने क्यों जाए यदि बाजार बंद करना हैँ तो पूरे तरिके से करो क्या सरकारी कार्यालय / किराणा दुकान /’बैंक / बस / रेलवे मे कोरोना नहीं आता..

सिर्फ ज्वेलरी / कपड़ा / स्टेशनरी /इलेक्ट्रिकल/ जनरल इत्या. और इन सबकी दुकानों मे आता हैँ.. क्या यही लोग कोरोना फ़ैला रहे हैँ जो इन्ही की दुकान दारो की बलि चढ़ रही हैँ जब जी मे आये तब इनकी दुकाने बंद करवा रहे… क्या इन्ही की दुकाने बंद करने से कोरोना अपने घर चला जायेगा… सुबह सब्जी मार्केट में इतनी गर्दी वो भी बिना मास्क के सरकार को दिख नहीं रही.. दिख रही हैँ तो माध्यम वर्गीय लोगो की दुकाने.. क्या ज्वेलरी / कपड़ा / जनरल इत्या. इन दुकानों मे क्या लोगो की लम्बी लाइने लगती हैँ.. मेडिकल सेवाएं छोड़ कर क्या किराणा और दूध डेरी वाले घर पहुंच सेवाएं नहीं दे सकते.. बाजार बंद करना हैँ तो पूरी तरह से करना चाहिए जिससे कोरोना की बलि चढ़े नाकि दुकानदारो की.. सरकारी ऑफिस और बैंक भी बंद होने चाहिए.. जब दुकाने बंद रहेगी तो दुकानों मे जो गरीब कामगार लोग हैँ काम करते हैँ वो कहा जायेगे.. क्या दुकान बंद करने से ही कोरोना मर जायेगा.. सरकार कह रही हैँ लोग लापरवाह हैँ तो उसका भी जिम्मेदार दुकानदार हैँ? कीराना की आड़ में सीगरेट और गुटखा भी बीक रहा है और खाना जब घर में बनाना है तो रेस्टोरेंट क्यों मीठाई खाने से क्या कोरोना नहीं होता या फीर कुछ लोगों को सारी उचीत अनुचीत छुट देकर बाकी व्यवसायीयों का शहर की जनता का नुक़सान करना है *लॉकडाउन के बावजूद भी लोग तो सारा दीन घर से बाहर निकल कर कीसी भी बहाने घुम ही रहे बल्की लौकडाउन का बाहर निकल कर आनंद ले रहे हैं ।