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घरों में नमाज अदा कर मनाई ईद की खुशियां , “देश में अमन शांति वायरस से मुक्ति की दुआ के साथ”

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उषा नाईक – कारंजा

वाशिम – इस्लामिक धर्म के हिसाब से रमजान का माह पवित्र माना गया है.इस माह में रोजे फर्ज किए गए.खासतौर से इस माह में सभी मस्जिदों में ईबादत करते है परंतु इस वर्ष कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण जो हालात बने हुए उससे बचने के लिए शासन-प्रशासन की और से जो दिशा-निर्देश जारी किए गए उस पर मस्जिदों के इमाम साहब के आदेशोंनुसार मुसलमान भाइयों ने घरों में ही ईद की नमाज अदा कर ईद-उल्-फित्र की खुशियां मनाई.इस मौके पर समाजबंधुओ ने एक दूसरे को गले मिलकर और टेलीफोन व मोबाईल की माध्यम से ईद-उल्-फित्र की मुबारकबाद दी.
अल सुबह 5 बजे समाजबन्धुओं अपने घरो में नमाज अदा की.सूर्योदय के बाद ईद का खुदबा अदा किया.विदित हो की कोरोना वायरस पर अंकुश लगाने के लिए शासन-प्रशासन की और सेविविध उपाय योजनाएं चलाई जा रही है.जिसमें धर्मिक स्थलों को भी बंद किया गया है.सामूहिक कार्यक्रमों पर भी बंदी लगाई गई.मुस्लिम समाज के कलेंडर के अनुसार 23 मार्च से रोजे व ईबादत शुरू हुए,मुस्लिम समाज के धर्म गुरु के निर्देश पर समाजबन्धुओं ने रमजान माह की नमाज न केवल घरों में अदा की,बल्कि इस वर्ष बड़ेही सादगीपूर्ण तरीके से अपने-अपने घरों में ही ईद-उल्-फित्र की खुशियां मनाई,दो माह से मस्जिद व जमातखाने की गतविधियों को सरकारी आदेश के अनुसार बंद किया गया था,सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन करते हुए.बड़े उत्साह के साथ ईद-उल्-फित्र मनाया.

घरों में ही शिर-खुरमे का आनंद
ईद-उल्-फित्र के मौके पर एक दूसरे के घर जाकर ईद मुबारकबाद देने से लगभग सभी ने दूरी बनाई थी.मोबाईल के माध्यम से ईद की मुबारक बात दी गई.सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन शिर-खुरमे के संदर्भ में नहीं किया गया.सभी ने अपने घरों में ही शिर-खुरमे का आंनद लिया.