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​वणी में पत्रकारों के ‘धरना’ प्रदर्शन के आगे झुकी पुलिस; भूखंड धोखाधड़ी मामले में पटवारी और मंडल अधिकारी समेत चार पर मामला दर्ज

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वणी (यवतमाल): तालुक के वडगांव (धंदीर) में जमीन के भूखंड (प्लॉट) की बिक्री में फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में खास बात यह है कि धोखाधड़ी का शिकार खुद एक पत्रकार हुए हैं। पुलिस द्वारा पिछले 18 महीनों से कार्रवाई टालने की वजह से शुक्रवार को वणी पुलिस थाने में भारी आक्रोश देखने को मिला। पत्रकारों द्वारा पुलिस थाने के भीतर ही 5 घंटे तक दिए गए कड़े धरने के बाद, आखिरकार देर रात चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
​क्या है पूरा मामला?
​शिकायतकर्ता पत्रकार सूरज रमेश चाटे और संध्या संजय तरवटकर ने जुलाई 2024 में वडगांव (ध.) स्थित गट संख्या 15/1-अ के प्लॉट नंबर 30 का सौदा किया था। आरोपी शैलेश दादाजी वाकडे (निवासी चंद्रपुर) ने अर्जनवीस (दस्तावेज लेखक) सतीश पुंडलीकराव केराम की मदद से इस प्लॉट को अपना बताया था। इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए तत्कालीन पटवारी (तलाठी) रवींद्र नीलकंठ उपरे और मंडल अधिकारी राजू नीलकंठराव डोंगरे ने आपस में सांठगांठ की और फर्जी फेरफार (म्यूटेशन) व फर्जी सातबारा (7/12) उतारा तैयार किया।
​शिकायतकर्ताओं द्वारा 1 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान चेक के जरिए करने के बाद यह खुलासा हुआ कि वह भूखंड वास्तव में किसी और के मालिकाना हक का था और उसके लिए इस्तेमाल किया गया फेरफार नंबर 1539 पूरी तरह फर्जी था।
​18 महीने की देरी और पुलिस की भूमिका
​इस गंभीर धोखाधड़ी को लेकर शिकायतकर्ता ने राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन से बार-बार न्याय की गुहार लगाई थी। यहां तक कि जिला पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा मामला दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद वणी के थाना प्रभारी (ठाणेदार) गोपाल उंबरकर कार्रवाई करने से कतराते रहे। शिकायतकर्ता पत्रकार सूरज चाटे ने आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों को बचाने के लिए पुलिस और राजस्व प्रशासन के बीच मिलीभगत थी।
​पत्रकारों का आक्रोश और राजनीतिक हस्तक्षेप
​शुक्रवार शाम करीब 5 बजे वणी के 20 से 25 पत्रकार सीधे पुलिस थाने पहुंचे। जब थाना प्रभारी ने टालमटोल वाले जवाब दिए, तो आक्रोशित पत्रकारों ने थाना प्रभारी के केबिन के सामने ही चटाई बिछाकर धरना आंदोलन शुरू कर दिया।
​माहौल को बिगड़ता देख पूर्व विधायक संजीवरेड्डी बोदकुरवार तुरंत पुलिस थाने पहुंचे। इसके बाद रात 9 बजे विधायक संजय देरकर भी मुंबई से सीधे वणी पुलिस थाने पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने पत्रकारों की मांग का समर्थन करते हुए दोषियों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। आखिरकार रात 10 बजे पुलिस को झुकना पड़ा।
​इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
​पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है:
​शैलेश दादाजी वाकडे (विक्रेता, चंद्रपुर)
​सतीश पुंडलीकराव केराम (अर्जनवीस, चिखलगांव)
​रवींद्र नीलकंठ उपरे (तत्कालीन पटवारी/तलाठी)
​राजू नीलकंठराव डोंगरे (मंडल अधिकारी)
​”सभी सबूत मौजूद होने के बावजूद केवल राजस्व अधिकारियों को बचाने के लिए 18 महीने तक टालमटोल की गई। जिला पुलिस अधीक्षक के आदेशों को भी ठेंगा दिखाया जा रहा था। यह लड़ाई केवल एक पत्रकार की नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ थी।”
— सूरज चाटे, शिकायतकर्ता पत्रकार
​इस घटना ने वणी में राजस्व और पुलिस विभाग के बीच की कथित ‘सांठगांठ’ को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या इस पूरे मामले की कोई उच्च स्तरीय जांच होगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।